बदले कि भावना मे हुई थी अहमदनगर शहर कि स्थापना

हमदनगर मध्यकालीन दकन का एक अहम शहर है। नगररचना और अद्भुत वास्तुकौशल्य तथा भौतिक विकास कि वजह से इसकी तुलना मध्यकालीन ‘बगदाद’ और ‘मिस्त्र’ के साथ होती रही। रेशम व्यापार और हबशी सरदारों का केंद्र रहे अहमदनगर को अरब जगत में काफी प्रतिष्ठा प्राप्त …

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मुग़लों कि सत्ता को चुनौती देनेवाला शेरशाह सूरी

ध्यकाल में राज्य के हर क्षेत्र में परिवर्तन कि बुनियाद रखनेवाले शासक के रुप में शेरशाह सूरी को याद किया जाता है। किसानों के प्रति उसकी सहानभूती अत्याधिक थी, जिसकी वजह से करप्रणाली की पूनर्रचना कि गयी थी।

प्रशासन में कई पदों

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तुघ़लक काल में कैसे मनायी जाती थी रमज़ान ईद?

मुहंमद तुघ़लक काफी उत्सवप्रिय व्यक्ती था। होली, दिवाली जैसे त्योहार वह काफी उत्साह से मनाता था। उसके दरबार में रमज़ान और बकर ईद मनाने कि एक विशेष पद्धती थी।

रमज़ान ईद के दिन ईदगाह जाकर नमाज पढ़ने, बकर ईद में कुर्बानी करने से लेकर …

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भारतीय भाषाओं में कुऱआन के अनुवाद का रोचक इतिहास

भारत में इस्लाम के आगमन के साथ ही कुऱआन के भाषांतर का इतिहास शुरु होता है। इस ग्रंथ का पहला अनुवाद दसवीं सदी के आखिर का गुजराती (उर्दू) है, जिसकी भाषा मसनवी यूसुफ ए जुलैखासे भी पुरानी है।

इसके साथ

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बेशर्म समाज के गंदी सोंच को कागज पर उतारते मंटो

आदत हसन मंटो के बारे में बहुत सी कहानियां किस्से प्रचलित है। मात्र इसके विपरीत मंटो की शख्सियत नजर आती है।

मंटो महज एक अफसानानिगार नहीं थे बल्कि वह एक पॉलिटिकल कमेंटेटर भी थें। नया कानून, अंकल सैम का खत

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बादशाह, उलेमा और सूफी संतो कि ‘दावत ए ख़ास’

ध्यकाल में इफ्तार कि दावतों का विशेष महत्त्व था। इन्हीं दावतों के जरिए विद्वानों कि परिचर्चा, मनमुटाव कि बैठकों तथा स्नेहमिलन का आयोजन किया जाता था।

‘दावत ए ख़ास’ के नाम से मशहूर यह इफ्तार भोज समाज के तीन भिन्न वर्गोंद्वारा आयोजित किया जाता

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निज़ाम हुकूमत में कैसे मनाया जाता था रमज़ान?





दिल्ली, अलीगढ़, लखनऊ, आगरा के साथ दकन में हैदराबाद के रमज़ान को भी ऐतिहासिक महत्त्व है। कुतुबशाही के दौर से इस शहर में रमज़ान कि विशेष संस्कृति के प्रमाण मिलते हैं। औरंगजेब के निधन बाद निज़ाम मीर कमरुद्दीन खान ने औरंगाबाद में

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डॉ. मुहंमद इकबाल का ‘नजरिया ए गौतम बुद्ध’

डॉ. इकबाल कि कविताओं में भारतीय इतिहास, संस्कृति, समाज और परिवर्तन कि बहस की गई है। भारत के इतिहास कि चर्चा करते हुए इकबाल गौतम बुद्ध, महावीर जैन, चार्वाक और नानक जिक्र करते हैं। इकबाल को विशेषतः गौतम बुद्ध के फलसफे

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औरंगाबाद का वह प्लेन हादसा जिसने देश को हिला दिया

तीन दशक पुरानी उस विमान दुर्घटना को याद करते हुए आज भी औरंगाबाद वासीयों के रोंगटे खडे हो जाते हैं, जब एक मामूली सी घटना 55 लोगो कि जान लेने का सबब बनी। उस समय इंडियन एअरलाइन्स के उस विमान में कुल 118 वीआईपी

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कोरोना संकट या एक-दूसरे को बेहतर समझने का मौका

मारा देश ही नहीं बल्कि सारी दुनिया एक अजीब दौर से गुजर रही है। सुना है कि एक-दो सदी पहले भी ऐसी कुछ बीमारियां आई थी, जिसमें प्लेग था, उसने आधे यूरोप को साफ कर दिया था, मौत के घाट उतार दिया था।

लेकिन …

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