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भारतवर्ष ने विदेशी हमलावरों को सिखाई तहजीब

नेहरु की लेखमाला :

पण्डित नेहरू का ‘Glimpses of world history’ ग्रंथ भारत का प्राचीन और विश्व के इतिहास को देखने कि उनकी दृष्टी एक संपन्न और सर्वकालिक दृष्टिकोण प्रदान करता हैं। इस नजरिए में और दृढता प्रदान करने के लिए हम पूर्व प्रधानमंत्री 

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सम्राट अकबर था ‘हिन्दोस्ताँनी राष्ट्रीयता’ का जन्मदाता

नेहरु की लेखमाला :

पण्डित नेहरू कि ‘Glimpses of world history’ किताब मध्यकालीन भारत के इतिहास का एक संपन्न और सर्वकालिक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। यह ग्रंथ 1934 में लिखा गया था।

आज जब मध्यकाल के इतिहास को तोड-मरोडकर पेश किया जा रहा हैं,

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औरंगजेब ने लिखी थीं ब्रह्मा-विष्णू-महेश पर कविताएं

रंगजेब के प्रति भारतीय इतिहास लेखन में आम धारणा जालीम, हिन्दुकुश, बुतशकीन बादशाह कि है। औरंगजेब कि कई नीतियों और सांस्कृतिक पुनरुज्जीवनवाद के प्रयासों से उसकी धार्मिक कट्टरता वाली छवी बनी हुई है। जिझिया को दुबारा लागू करना तथा सिखों और मराठों

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क्या सर सय्यद अलगाववाद के बानी और अशरफ मुसलमानों के नेता थें?

र सय्यद अहमद खान स्वतंत्रता पूर्व भारत में सामाजिक सुधार, धार्मिक चिंतन कि पुनर्व्याख्या और शिक्षा के प्रसार के लिए लडते रहे। उनका मानना था की,अंग्रेजो से मुकाबला करना अब संभव नहीं है और उनसे लडने कि क्षमता हम खो चुके हैं, अब उनसे

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बाल्कन युद्ध से आहत मुहंमद अली जौहर खुदकुशी करने वाले थें

कॉम्रेडनामी अखबार से अपनी सियासी जिंदगी कि शुरुआत करनेवाले मुहंमद अली जौहर खिलाफत आंदोलन के प्रणेता के रुप में जाने जाते हैं। अलीगढ विश्वविद्यालय का विस्तार और जामिया मिल्लिया इस्लामिया कि स्थापना उनके जिन्दगी के चंद अहम कारनामें हैं। हमदर्द

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रजिया सुलताना, शेरशाह और जायसी को डॉ. लोहिया बाप मानते थें

राम मनोहर लोहिया हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं। हिन्दू-मुसलमानों के सांप्रदायिकता पर उन्होंने 3 अक्तूबर 1963 को हैदराबाद में एक लंबा भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने इस मसले का हल बताया था। आज डॉ. लोहिया कि पुण्यतिथि के अवसर पर …

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ख्वाजा शम्सुद्दीन गाजी – दकन के चिश्ती सुफी संत

कन में इस्लामी समतावादी विचारधारा का प्रसार करने के लिए 11वी सदी के शुरुआत से ही कुछ सुफी संत यहां आ रहे थे। तेरहवीं सदी तक दकन के लगभग हर बडे शहर में सुफी अध्यत्मिक आंदोलन पहुंच चुका था। खुलताबाद के सुफी अध्यात्म केंद्र

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CAA विरोधी आंदोलन धार्मिक एकता स्थापित करने का समय

पिछले दिनों पुणे के आजम कॅम्पस में नागरिकता कानून के विरोध में विशाल जनसभा हुई। जिसमें जमात इस्लामी के नायब सदर एस. अमीनुल हसन ने संबोधित किया उन्होंने अपने तकरीर में मुसलमानों के कई सामाजिक मसलो पर बात की जिसके एक

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होस्नी मुबारक वो तानाशाह जिसने मिस्र को विनाश कि ओर धकेला

मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के निधन से अरब जगत के तानाशाही का एक चैप्टर हमेशा के लिए इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गया। 9 साल निर्वासित जिन्दगी बिताने के बाद मुबारक 25 फरवरी को एक कभी न लौटने वाली लंबी यात्रा

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महिलाओं को अधिकार देना मुसलमान कबुल क्यों नही करते?

रवरी के 29 को पुणे के आजम कॅम्पस में नागरिकता कानून के खिलाफ जनसभा हुई जिसमें मौलाना सज्जाद नोमानी और जमात ए इस्लामी के नायब सदर एस. अमिरुल हसन ने लोगों से खिताब किया 

अपने एक घंटे के तकरीर में उन्होंने

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