फिर एक बार हो बहुलता में ‘भारत’ कि खोज

क्या भारत भी एक देश है? यह एक विचित्र सवाल नहीं है। विंस्टन चर्चिल ने कभी उत्तेजना में कहा था कि “भारत मात्र एक भौगोलिक अभिव्यक्ति है। यह भूमध्य रेखा से अधिक एक देश नहीं है.” इसी भावना को सिंगापुर के संस्थापक ली कुआन येन

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पैगंबर के स्मृतिओ को संजोए खडा हैं बिजापूर का आसार महल

बिजापूर शहर आदिलशाही सल्तनत काल में गंगा-जमुनी तहजीब का अप्रतिम मिसाल रहा हैं। आज इसके कई प्रमाण शहरभर घुमने  के बाद आसानी से मिल जायेंगे। इस आलेख में बिजापूर के आसार महल कि कहानी हैं, जो अपनी कई विशेषत: के लिए प्रसिद्ध हैं। इस …

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दकन के दो अस्मिता पुरुष – छत्रपति शिवाजी और वली औरंगाबादी

लिक अंबर के पश्चात छत्रपति शिवाजी महाराज ने दकन के राजनैतिक अस्मिताओं का प्रतिनिधित्व किया। दक्षिण में स्वराज्य के माध्यम से उन्होंने दकन कि राजनिती को स्वतंत्र रखा। दकनी भाषा के लोकप्रिय कवी वली औरंगाबादी ने दकनी संस्कृती अपने साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय

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Archive

औरंगाबाद कि शुरुआती दौर की बेहतरीन इमारतें

लिक अंबर (Malik Amber) ने सन 1616 में अपने निवास के लिए खाम नदी के किनारे एक अलिशान खुबसुरत महल बनवाया था। जिसका नाम ‘नवखंडा महल’ (Naukhanda Palace) था।

इस महल के नौ हिस्से थेइसीलिए यह ‘नवखंडा

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‘देहली कॉलेज’ ब्रिटिशों के खिलाफ करता रहा अस्तित्व का संघर्ष

पुरानी दिल्ली में आलमगीर द्वितीय के वजीर नवाब गाजिउद्दीन खान ने ईसवी 1792 में अजमेरी दरवाजे के बाहर एक शैक्षिक संस्था स्थापन की थी। जो बाद में ‘मदरसा गाजिउद्दीन खाँ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

यहां अरबी, फारसी, कुरआन व कुरआन भाष्य, हदिस

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बंदा नवाज़ गेसू दराज – समतावादी सूफी ख़लिफा

त्तर की तुलना में सरजमीने दखन में सुफी आंदोलन की सरगर्मीयां आधिक रही। सुफी आंदोलन ने यहां नए आयाम स्थापित किए। विशेषतः हिंदू निचली जातीयों में इस्लाम के प्रसार में उनकी अहम भूमिका रही। रिचर्ड इटन जो दखनी सुफी आंदोलन के महान अभ्यासक हैं।…

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