शम्‍सुर्रहमान फ़ारूक़ी : उर्दू आलोचना के शिखर पुरुष

र्दू साहित्य के मशहूर तख़लीककार और अदीब शम्‍सुर्रहमान फ़ारूक़ी (Shamsur Rahman Faruqi) को कुछ लोग कई चांद थे सर-ए-आसमांके लिए जानते जबकि कुछ तो उनकी पत्रिका शब खून के लिए। पर महज उनका साहित्यिक सफर यहीं तक सिमित

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राजेश खन्ना अद्भूत लोकप्रियता हासिल करने वाले सुपरस्टार

राजेश खन्ना बॉलिवुड के पहले सुपरस्टार थे। जिनकी फिल्मों का जादू आज भी तिसरी पिढी के सर चढकर बोलता हैं। उनका नाम आते ही उनके स्वाभाविक अदाकारी क नक्श आँखो के सामने तैरने लगते हैं। उन्हें आँखो द्वारा अभिनय करने के लिए जाना जाता

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तीन लाख डॉलर में बिकती थी तैयब मेहता की पेंटिग

मकालीन भारतीय कला इतिहास में तैयब मेहता अकेले पेंटर थे जिनका काम इतनी अकल्पनीय कीमतों में बिका है। तैयब एक शांतखामोशबेचैनसजग और जनचेतना के चितेरे थे। वे निहायत संकोची, विनम्र और अपनी कला में डूबे रहने वाले

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सूफी-संतो को कभी नहीं थी जन्नत की लालसा!

मुस्लिम शासकों द्वारा सिंध व उत्तर भारत पर कब्ज़ा किए जाने से पूर्व अरब व्यापारी मलबार तटों पर इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए आये।

उन्होंने यहां मस्जिदों का निर्माण किया और स्थानीय महिलाओं से विवाह करके भारत में अपने घर बनाए। उन्हें नोपलह

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Reuters

मीडिया में वैकल्पिक कारोबारी मॉडल क्यों जरुरी हैं?





प्रो. आनंद प्रधान का नजरिया :

न दिनों टीवी न्यूज चैनल खुद सुर्खियों में हैं। अधिक से अधिक दर्शकों को आकर्षित करने यानी टीआरपी की अंधी दौड़ में आगे रहने के लिए उनमें लगातार गटर में और नीचे गिरने की होड़ लगी है।

न्यूज

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टिपू सुलतान रोज नाश्ते पहले मंदिर क्यों जाता था?

मैं कुछ ऐसे उदाहरण पेश करता हू, जिनसे यह स्पष्ट हो जाएगा कि ऐतिहासिक तथ्यों को कैसे विकृत किया जाता हैं। जब मैं इलाहाबाद में 1928 ईसवीं में टिपू सुलतान के संबंध मे रिसर्च कर रहा था, तो अग्लों-बंगाली कॉलेज के छात्र-संगठन के कुछ पदाधिकारी …

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रफ़ीउद्दौला जो रहा चंद महीनों का मुग़ल सम्राट

गंभीर रूप से बीमार बादशाह रफी-उद-दरजात का आखिरी वक्त आया था। ये देखकर सैय्यद भाई विचार करने लगे कि बन्दी शहजादों में से किसको समय के गर्त से निकाल कर अब गद्दी पर बैठाया जाए।

इस बीच बीमार बादशाह ने सैय्यद बंधुओं से अनुरोध …

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अनपढ़ होते हुये भी सम्राट अक़बर था असीम ज्ञानी

नेहरु कि लेखमाला :

पंडित नेहरू ने ‘Glimpses of world history’ किताब में मध्यकालीन भारत के इतिहास पर विस्तृत रोशनी डाली हैं इसमें सम्राट अकबर पर लिखा लेख उसका बेहतरीन व्यक्तित्व पेश करता हैं आज जब मध्यकाल के इतिहास को तोड-मरोडकर

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Rane Prakash/Hindustan Times

वो आपातकाल था, तो यह ‘आफ़तकाल’ हैंं





प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गये आपातकाल को 45 साल हो चुके हैं मगर आज के दौर में भी देश के हालात उसी तरह नजर आते हैं, जैसे 1975 में थे इस स्थिति पर चर्चा करता वरीष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त का यह आलेख

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‘गलवान’ सीमा विवाद में गुलाम रसूल कि कहानी क्या हैं?

भारत-चीन तनातनी को लेकर ‘गलवान घाटी’ का नाम बीते कुछ दिनों से चर्चा में हैं। इतिहास में यह जगह एक ऐसे व्यक्ति के नाम दर्ज हैजिसने गलवान नदी के मूल स्त्रोत का पता लगाया था।

इसी शख्स के नाम उस

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