उदार और धर्मनिरपेक्ष निज़ाम जब हुए दुष्प्रचार के शिकार !

पंधरा अगस्त 1947 को भारत तमाम संघर्ष के बाद आजाद तो हो गया लेकिन उस वक्त सरकार के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती थी वह 565 छोटी-बड़ी रियासतों के विलय की थी। चूंकि कांग्रेस ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि आजादी के

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रेप मामलों में कानूनी सख्ती की मांग, पर मानसिकता का क्या?

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली मुंबई की बलात्कार की घटना को ले कर इन दिनों महाराष्ट्र में बेहद गुस्से और आक्रोश का माहौल बना हुआ हैं। सोशल मीडिया पर कैंपेन चल रहे हैं, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सियासत

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अफ़ग़ान-अमेरिका निरर्थक जंग के अनसुलझे सवाल

गर अफ़ग़ानी सैनिक नहीं लड़ते तो मैं कितनी पीढ़ियों तक अमेरिकी बेटे-बेटियों को भेजता रहूं। मेरा जवाब साफ है। मैं वो गलतियां नहीं दोहराऊंगा जो हम पहले कर चुके हैं।  .. क्या हुआ है? अफगानिस्तान के राजनीतिक नेताओं ने हाथ खड़े कर

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क्या हैं असम-मिजोरम संघर्ष का इतिहास ?

पूर्वोत्तर के दो राज्य असम और मिजोरम के बीच बीते दिनों सीमा से जुड़े विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। दोनों राज्यों की बॉर्डर पर देखते ही देखते हिंसा ने इतना भयावह रूप ले लिया कि पत्थरबाजी, गोलाबारी तक की नौबत

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जनसंख्या नियंत्रण में मुसलमानों का योगदान ज्यादा

त्तर प्रदेश में बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-2030 का ऐलान किया हैं। इस के बाद से ही पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग हो

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अफगान में तालिबान से हारा अमेरिका, अब आगे क्या !

स समय पूरी दुनिया की नज़र अफगानिस्तान की हलचल पर है, जब से अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी की समय सीमा नज़दीक आ रही है अफगान के पड़ोसियों के माथे पर शिकन बढ़ती जा रही है। वजह है तालिबान का अफगानिस्तान में फिर बढ़ता

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सांस्कृतिक भारत को जानना हैं तो नज़ीर बनारसी को पढ़ना होगा !

रहदों से दूर होती है कविता, एक देश का कवि या शायर दूसरे मुल्क में जा कर अपने कलामों, गज़लों और नज़मों से लोगों को बाग-बाग कर सकता है। खुश कर सकता है। आपस की दीवारों को गिराने का काम साहित्य या

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अभिनय के साथ दिलीप कुमार की राजनीति में भी थी चमक

हिन्दी सिनेमा के लिजेंड दिलीप कुमार आज हमारे बीच नही हैं। पर उनकी यादे, उनसे जुड़ी बाते और उनकी जीवनी हम सब के लिए एक दिशादर्शक हैं। जिसकी चर्चा करना लाजमी हो जाता हैं।

40 के दशक में फ़िल्मों में आने से पहले दिलीप

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पिता के डर से दिलीप कुमार ने फिल्मों में बदला था नाम

हिन्दी सिनेमा ने यूँ तो एक से एक कई शानदार अभिनेता दिए हैं लेकिन दिलीप कुमार एक ऐसे अदाकार थे जिन की बात ही कुछ और थी। बॉलीवुड के साहिब ए आलम कहे जाने वाले दिलीप कुमार का बुधवार सुबह करीब साड़े सात बजे …

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मर्दाने समाज में स्त्रीत्व की पहचान परवीन शाकिर!

रवीन शाकिर उर्दू शायरी का एक जाना माना नाम है। वर्जनाओं से भरे समाज में उन्होंने भावनाओं से भरी कलम को चुना और इसकी स्याही का रंग स्त्रीत्व के गुलाल से रंगा था। कमोबेश, अपनी हर रचना में उन्होंने स्त्री मन के कोमल

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