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मीडिया में वैकल्पिक कारोबारी मॉडल क्यों जरुरी हैं?





प्रो. आनंद प्रधान का नजरिया :

न दिनों टीवी न्यूज चैनल खुद सुर्खियों में हैं। अधिक से अधिक दर्शकों को आकर्षित करने यानी टीआरपी की अंधी दौड़ में आगे रहने के लिए उनमें लगातार गटर में और नीचे गिरने की होड़ लगी है।

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मीडिया जो परोस रहा है, क्या उस दायरे में सच भी है?

राजनीति लोकतंत्र को हांकती है। लोकतंत्र राजनीतिक सत्ता की मंशा मुताबिक परिभाषित होती है। लोकतंत्र के चारो स्तंभ लोकतंत्र को नहीं राजनीतिक सत्ता को थामते हैं या फिर विरोध की राजनीति धीरे-धीरे सत्ता के विकल्प के तौर पर खड़ा होना शुरु होती है तो

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अच्छी खबरें ही देखें‚ ‘भोंपू़ मीडिया’ को करें खारिज

कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ही नहीं‚ कम से कम देश के दो उच्च न्यायालय मीडिया में खबरों (ॽ) के गिरते स्तर को लेकर चिंतित रहे। सुप्रीम कोर्ट ने एक कार्यक्रम को राष्ट्र के लिए अहित करने वाला बता कर रोका तो बॉम्बे हाई

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