प्रधानमंत्री ऐलान करेंगे उठ जीडीपी, उठ जीडीपी!

प्रधानमंत्री ऐलान करेंगे उठ जीडीपी, उठ जीडीपी!
FB/Javed Dar

अनंतनाग जिले के एक गांव में किसान अनाज बोरी में भरता हुआ


कोविड-19 के महामारी को लेकर निचले सदन लोकसभा में 20 सितम्बर 2020 को तिखी बहस हुई। जिसमें विपक्ष ने सरकार पर महामारी से निपटने के लिए अकार्यक्षमता बरतने को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। सभी विपक्षी दलों का कहना था, महामारी से निपटने के लिए थाली बजाना, ठोल पिटना जैसी बेहुदी कृतीयाँ की गई, फिर भी हम कोरोना संक्रमण में दुनिया में चढ़ता क्रम रखते हैं। इम्तियाज जलील और हसनैन मसूदी ने भाग लिया था, उनके भाषण लोकसभा टीवी के सौजन्य से यहां दे रहे हैं।

सय्यद इम्तियाज जलील (औरंगाबाद) : सभापति महोदय, मुझे 8 मई, 2020 की वह सुबह आज भी याद है, जब सुबह-सुबह मुझे फोन आया और यह जानकारी मिली कि 16 मजदूर जो मध्य प्रदेश जाना चाह रहे थे, वे ट्रेन के नीचे आकर मर गए। मैं जब उस जगह (औरंगाबाद के समीप घटनास्थल) पर पहुंचा, जहां उन मजदूरों की मौत हुई थी, वहां पुलिस वाले थे, मैंने पूछा कि कितने लोगों की मौत हुई, ये बॉडीज कहां पर और किस अस्पताल में ले जाई गई हैं?

मुझे बताया गया कि ये लाशें अभी भी वहीं पड़ी हुई हैं। लाशों का मतलब यह था कि वहां पर छोटे-छोटे गोश्त के टुकड़े पुलिस वाले थैलों के अंदर भर रहे थे। उस दिन टेलीविजन के ऊपर यह खबर चलाई गई कि एक्सिडेंट के कारण 16 मजदूरों की मौत हो गई।

लेकिन, मैंने उस दिन भी कहा था, आज एक बार फिर से यहां पर दोहराता हूं कि वह एक्सिडेंट नहीं था, बल्कि हत्या थी। उस हत्या के जिम्मेदार हम सब लोग हैं, जिन्होंने उन मजदूरों को सड़कों के ऊपर छोड़ दिया था। यह महज एक इक्तेफ़ाक हो सकता है कि उसी दिन अखबार में यह खबर आई थी कि विदेशों में रहने वाले जो भारतीय हैं, उनके लिए विशेष प्लेन चलाए जाएंगे।

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क्या हमने उन मजदूरों को सड़को पर मरने के लिए इसलिए छोड़ दिया क्योंकि हमें इनकी याद सिर्फ इलेक्शन के वक्त आती है? जो विदेशों में रहते हैं, उनके लिए विशेष प्लेन का प्रबंध किया गया था। सभापति महोदय, मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि आज छ: महीने के बाद क्या हिन्दुस्तान का एक भी शहर यह दावा करके कह सकता है कि हमारे पास पर्याप्त वेंटीलेटर्स हैं, हमारा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से सक्षम है?

आज भी जिस शहर के हॉस्पिटल में वेंटीलेटर्स हैं, वहां डॉक्टर्स नहीं हैं, जहां डॉक्टर्स हैं, वहां ऑक्सिजन नहीं है और जहां वेंटीलेटर्स हैं, ऑक्सिजन है और डॉक्टर्स भी हैं, वहां बेड्स उपलब्ध नहीं हैं। जब हमने आपसे वेंटीलेटर्स के बारे में पूछा तो आपने कहा कि थाली बजा लो।

जब हमने आपसे कहा कि डॉक्टर्स नहीं हैं, ऑक्सिजन नहीं है तो आपने कह दिया कि दिए जला लो, अंधेरा कर लो। आज जब जीडीपी इतनी गिर गई है तो हम सरकार की तरफ से एक फरमान सुनना चाह रहे हैं कि कब आएंगे वज़ीरे आज़म और यह ऐलान करेंगे कि अब सड़कों पर निकलों, ढोल बजाओ और यह ऐलान करो कि उठ जीडीपी, उठ जीडीपी, जिस तरह हमने गो कोरोना, गो कोरोना का ऐलान किया था।

हमने अपना मजाक पूरे मुल्क में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने बनाया था। चाइना के अंदर इस बीमारी का जन्म हुआ। इटली, ब्राजील, स्पेन के अंदर यह पली-बढ़ी। जैसे ही यह भारत के अंदर आई तो इसने हिन्दू और मुसलमान की शक्ल इख्तियार कर ली।

मंत्री जी, हमें बड़ा अफसोस होता है, जब इस सदन के अंदर बैठे हुए एक सांसद यह कहते हैं कि यह बीमारी इस देश के अंदर तबलिगी जमात की वजह से फैली। अगर कोई कसूरवार था तो वह आपकी सरकार है, आप उसके ऊपर कार्रवाई कीजिए। लेकिन, इस प्रकार से ऐसे मौकों पर जब लोगों की जाने जा रही थीं, उस वक्त हम हिन्दू-मुसलमान कर रहे थे।

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सभी टेलीजिवन चैनल्स पर यह दिखाया जा रहा था कि यह बीमारी अगर हिन्दुस्तान में फैली है तो सिर्फ तबलिगी जमात की वजह से फैली है। अगर किसी की तरफ से कोई गलती थी तो आप बोलिए, आपकी ही सरकार है।

सभापति महोदय, आज हमें मालूम है कि संकट गहराया हुआ है। हम सरकार का पूरी तरह से साथ दे रहे हैं, ऐसा नहीं है कि अगर हम विपक्ष में है तो हर चीज की आलोचना कर रहे हैं। आपने मेहनत की है, कोशिश की है, लेकिन जिस तरह के फैसले लिए जा रहे थे, उनसे ऐसा नहीं लग रहा था कि मुल्क के अंदर लोकतंत्र है, बल्कि ऐसा लग रहा था कि तानाशाही है।

आप चार घंटे पहले आकर कहते हैं कि चार घंटे बाद देश बंद हो जाएगा और देश बंद कर दिया गया। आज यही हालात रहे तो इस मुल्क के वजीर ए आलम को देखकर हम यही कहेंगे कि बोले तो बोलें क्या और करें तो करें क्या, वाह मोदी जी वाह...

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हसनैन मसूदी (अनंतनाग) : जनाब चेयरपर्सन साहब, मुझे इस बहस में शिरकत का मौका देने के लिए शुक्रिया। जनाब, पैन्डेमिक कोविड -19 के खिलाफ जंग का आगाज़ गफ़लत से हुआ और यह मिसमैनेजमेन्ट की एक दास्ताने-कहानी है। इसी मिसमैनेजमेन्ट की वजह से जो इंतिज़ामात किए गए, आज हमारा मुल्क ब्राजील को पार कर चुका है और अमेरिका के बाद अपने यहाँ कोविड -19 के सबसे ज्यादा केस हैं।

इसमें जो रोज़ाना इजाफा होता जा रहा है, उससे हम सारी दुनिया में सबसे आगे चले गए हैं। कोविड -19 ने हमारे मुल्क में 31 जनवरी को दस्तक दी। जब पहली मौत हुई, जिसका पहले जिक्र हुआ कि वुहान से आए और उनका यहां देहांत हुआ और वे इसका पहले शिकार हुए।

इसमें यह होना चाहिए था कि उसके फौरन बाद हमारी सारी तवज्जोह मरकूज (ध्यान केंद्रीत) होती, कोविड के खिलाफ इंतिज़ामात करने पर, उसके बजाय क्या हुआ कि हमने फरवरी का सारा महीना कुछ और मामलात पर ज़ाया किया, जिनमें ''''नमस्ते ट्रंप'''' और कुछ ऐसे ही प्रोग्राम्स थे।

इस पर हमारी जो क्षमता थी, हमारे पास जो इंफ्रास्ट्रक्चर था, उसको बढ़ाने पर कोई तवज्जोह नहीं दी। इसी वजह से जब लॉकडाउन का एलान किया गया तो हमारे मुल्क में करीब एक लाख से कम वेन्टिलेटर्स थे और पीपीईज़ और मॉस्क का कहीं पर नामोनिशान नहीं था।

इसके अलावा, साढ़े तीन घंटे की नोटिस के बाद जो लॉकडाउन कराया गया, उससे तो सारा मुल्क और खासकर जो गरीब तबका है, वह एक मुसीबत में आ गया। हमारा जो मजदूर तबका है, जो माइग्रेन्ट मजदूर थे, वे बड़ी मुसीबत में आ गए। हमने जो मंजर देखें, वह दिल को हिलाने वाले मंजर थे।

हमने बच्चों की जो अम्बार (कतारे) देखी, हमने जो स्टार्वेशन डेथ्स (भुखमरी से मौते) देखी, वह एक अलग ही परेशान करने वाली कहानी है। अब जब हम जम्मू-कश्मीर के बारे में आते हैं, वहाँ के लिए 5 अगस्त, 2019 को जो कदम उठाया गया था, जिसकी वजह से लॉकडाउन की शुरुआत हुई।

हम पहले से ही लॉकडाउन में थे। यह जो साढ़े तीने घंटे का लॉकडाउन लगाया गया, उससे हमारे करीब एक लाख मजदूर हिमाचल प्रदेश और पंजाब में फंस गए। वहाँ पर उनके लिए फिजिकल डिस्टेन्सिंग के लिए कोई प्रोग्राम नहीं था, कोई प्रोविज़न नहीं था।

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उससे यह हुआ कि 8 हफ्ते तक उनके वतन वापस लौटने तक ताख़ीर की गई। उनमें से बहुत सारे अफेक्टेड हो गए और कोविड-19 की ज़द में आ गए। जब वे वापस कश्मीर पहुँचे या जम्मू के विभिन्न इलाकों में पहुंचे तो वहाँ और ज्यादा फैलाव हो गया, क्योंकि वहाँ पर फिजिकल डिस्टेन्सिंग का कोई प्रोग्राम नहीं था।

वहाँ पर भी उनको पंचायत घरों और प्राइमरी स्कूलों में रखा गया। उसके बाद हमारे पास कोई इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। मेरे निर्वाचन क्षेत्र (अनंतनाग) में कुल मिलाकर दस से कम वेन्टिलेटर्स थे। ऐसा नहीं कि वहाँ काम नहीं हुआ, बल्कि चाहे हमारे शेर--कश्मीर मेडिकल इंस्टिट्यूट्स के डॉक्टर्स हो, चाहे जम्मू अस्पतालों के डॉक्टर्स हो, उन्होंने मेहनत से इसको काबू में लाया।

आज तक 40,000 के करीब रिकवरी हुई हैं। अभी भी 62,000 के करीब हमारे पेशेंट्स वहाँ मौजूद हैं, जिनके लिए इंतिज़ामात किए जा रहे हैं। हमारे जो फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं, उन सारे के मेहनत के बावजूद भी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से आज भी काफी परेशानी है।

इस वक्त जम्मू में ऑक्सीजन की कमी है। जम्मू में बेड्स की कमी है और जम्मू में मरीजों को एम्बुलेंस का इंतजाम करना पड़ता है। एक लाख रुपये एक एम्बुलेंस वाला दिल्ली पहुंचाने के लिए और 30 हजार रुपये पठानकोट पहुंचाने के लिए लेता है।

मैंने अपने एमपी लैड से डेढ़ करोड़ रुपये वेंटिलेटर्स खरीदने के लिए दिए, उसमें भी ताख़ीर (देरी) हो गई। यह नहीं है कि काम नहीं हो रहा है। मेरी सूचना के मुताबिक हमारे यहां करीब 14 लाख टेस्ट्स हो चुके हैं, लेकिन इसको स्ट्रेंग्थेन (बढोत्तरी) करने की जरूरत है। अब देखिए, स्कूल्स बंद हैं, कॉलेजेस बंद हैं और सभी स्टूडेंट्स डिजिटल एजुकेशन पर डिपेंड हैं।

जब फोर-जी है ही नहीं, तो वे कैसे डिजिटल एजुकेशन को एक्सेस करेंगे? जो ऑनलाइन क्लास हैं, उनसे वे महरूम हैं। एक जरूरत है कि जम्मू-कश्मीर की तरफ खास तवज्जोह दी जाए, ताकि वहां जो भी कोविड 19 के खिलाफ लड़ने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर है, वह स्ट्रेंग्थेन हो जाए।

इसके बजाए बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। पैकेजेज़ के नाम पर जो नुकसान हुआ, उसका 10 पर्सेट भी नहीं दिया जा रहा है। हमारे यहां 5 अगस्त से लंबा लॉकडाउन है। उसको नजर में रखकर वहां और भी प्रयास करने की जरूरत है। What happened when we were caught napping, उससे बाद में जो भी उपलब्धियां हुई, जो भी कामयाबी हुई, वह अपनी जगह पर सही बात है, लेकिन जो इनीशियल हमारी नेगलिजेंस हुई, जो गफलत इंश्योर हुई, उसी गफलत की वजह से उसी का हम आज खामियाजा भुगत रहे हैं।

मेरी यह गुजारिश होगी कि एक तो फोर-जी रीस्टोर किया जाए ताकि डिजिटल एजुकेशन के लिए, ऑनलाइन एजुकेशन के लिए डिजिटल एक्सेस हो सके। ट्रेड बंद है, कुछ भी नहीं हो रहा है। हमें टेस्टिंग कैपेबिलिटी बढ़ानी है। खासकर जम्मू में, इस वक्त जम्मू सबसे ज्यादा पीड़ित है, तो जम्मू में खासकर प्रयास करने हैं। वहां एक टीम गई हुई। श्रीनगर भी एक टीम गई हुई है, ताकि काम में और ज्यादा प्रगति आ जाए।

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author

टीम डेक्कन

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