‘झुठ और धोकेबाजी से निरस्त हुई धारा 370’

‘झुठ और धोकेबाजी से निरस्त हुई धारा 370’
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अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बिल का विरोध करते PDP के राज्यसभा सदस्य


चार मार्च को राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने राष्ट्रपति के बजट सत्र पर दिए अभिषाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। जिसमें आजाद ने कश्मीर के अनुच्छेद 370 को लेकर बीजेपी सरकार पर गुमराही और धोकेबाजी का आरोप लगाया। क्षेत्र में विकास न होने का झुठा नरेशन खडा किया गया। उन्होंने कहा कि, झुठी अफवाए फैलाकर दफा 370 हटाया गया। भारत सरकार कि अधिकृत आंकडेवारी पेश कर उन्होंने अपने दावे कि पुष्टी की। आजाद के इस भाषण को हम संपादित कर तीन भागों में दे रहे हैं। पेश हैं आज उसका दूसरा भाग।

राष्ट्रपति के भाषण में काश्मीर के आर्टिकल 370 को लेकर एक पेज लिखा गया था। 5 अगस्त 2019 को हमने जिंदगी में पहली दफा उस बिल संसद में पढा। पिछले 40-42 साल से हम पार्लिमेंट में है। हमने यह भी देखा कि ऐसे भी बिल आते हैं। इस तरह से भी कानून पास होते हैं। हमने यह भी पहली बार देखा कि कानून बनाने से पहले देश को कैसे गुमराह किया जाता हैं। जुलाई के आखिरी हफ्ते में कहा गया जम्मू-कश्मीर में कोई मिलिटेंट का खतरा है। इसलिए अमरनाथ यात्रा को बंद कर दिया गया। लोगों को वापस बुलाया गया।

सबसे बड़ा मजाक तो यह था कहीं से एक बंदूक पकड़ी गई। उस राज्य में हमने एक-एक दिन में एक-एक हजार तक बंदूके और राइफल पकडी है और कभी उसपर हमने पब्लिक मिटिंग भी नही की। जबकि सरकार कि ओर से एक बंदूक पकडकर पब्लिक मीटिंग की जा रही थी ऐसा कोई बताते हैं कि आइटम बम आ रहा है और बंदूक-राइफल पकड़ी हैं आप (सरकार) इतने डरपोक है क्या कि उस राइफल से पूरा हिंदुस्तान डर गया और आप ने (सरकार) पूरी यात्रा स्थगित कर दी आपने पूरी दुनिया को डरा दिया और कहा कि एक राइफल पकड़ी गई है इसलिए अमरनाथ यात्रा रद्द कर देनी पडी हैं।

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उस समय तकरीबन डेढ़ लाख के करीब टूरिस्ट कश्मीर के अंदर मौजूद थे। मैं बाद में उन हाउस बोर्ड में गया था। उन लोगों ने मुझसे कहा कि टूरिस्ट जा नहीं रहे थे। हाउस बोर्ड वालों ने उनसे कहा भी के आप जाओ। वहां पुलिस आई और उन हाऊस बोर्ड वालों से कहा हम तुमको बंद कर देंगे अगर टूरिस्टो को आप जाने नहीं देंगे। पुलिस का खौफ बता कर आप ने टूरिस्टो को वहां से निकाल दिया। और क्या किया टूरिस्ट विथड्रा किए! यात्री निकाल दिए गए। एडिशनल फोर्सेस यहां से भेजी गई।

हमें पहले लगा कि शायद उस पार बड़ी कार्यवाही करनेवाले हैं। बडे अरसे से आप पीओके लेने की बात कह रहे थें। हमें लगा कि पीओके वापस होने वाला हैं। रात में ही सब लीडर अंदर हो गए। सैकड़ों लीडर जेलों में चले गए। मैं दिल्ली में था पार्लमेंट चल रहा था। वरना हम भी अभी किसी जेल में पड़े रहते।

इस तरह से कानून लाया जाता है यह हमने पहली दफा देखा। हमने भी पंजाब, आसाम, मिझोरम के लिए कानून लाए। लेकिन इस तरीके हमने नहीं लाया और यहां भी सदन में बिल की कोई चर्चा नहीं हुई। यहां बिल तो जम्मू कश्मीर के पिछड़े समुदायों के लिए 10 प्रतिशत रिजर्वेशन देने का बिल लगा था। हम उसके लिए तैयारी करके आए थें। आर्टिकल 370 को निरस्त करने के बिल की चर्चा नहीं हुई। डिस्कशन नहीं हुआ। बिजनेस एडव्हिजिट कमेटी में नहीं आया। टाइम नहीं हुआ लेनी नही हुआ। बिल सर्क्युलेट नहीं हुआ और भाषण Jammu-Kashmir Abrogation of Article 370 or two Union tertiary का कानून पेश हो रहा हैं।

मैं जानता हूं कि इन 6 सालों में हिंदुस्तान के एक-एक इंस्टिट्यूशन को एक-एक करके आपने खत्म किया। यह आखरी इंस्टिट्यूशन था जो 5 अगस्त को आप (सरकार) नें खत्म कर दिया। पार्लिमेंट, पार्लिमेंटरी सिस्टम, पार्लिमेंट प्रोसीजर, पार्लिमेंट डेमोक्रेसी को आपने 5 अगस्त को खत्म कर दिया। पार्लमेंट के तमाम नियम, कायदे, कानून सबको आपने तोडकर जबरदस्ती से यह कानून पास कर लिया।

ऐसा कभी हुआ नहीं था। हम अपनी पार्टी को व्हीप नहीं दे पाए। दूसरे पॉलीटिकल पार्टीज को अपने दलो को व्हीप नहीं दे पाए। इस बारे में किसी को मालूम नहीं था क्योंकि उस समय यहां जो बिल लिखा गया था वह 10 प्रतिशत रिजर्वेशन का था। हम उस बिल से सहमत थे। हम सरकार के साथ थें। इस तरह से लोकतंत्र चलता है? इसी को आप सबका साथ और सबका विकास कहते हैं? यही है सबका साथ? यही है सबका विकास? और विश्वास!

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5 फरवरी 2015 को जब मुफ्ती साहब की और बीजेपी के लीडरों की यहां बातचीत चल रही थी, मैंने उसी समय बताया था, माननीय प्रधानमंत्री जी बैठे थे। स्व. अरुण जेटलीजी बैठे थे। मैंने उसी वक्त कहा था आप नॉर्थ ईस्ट और जम्मू कश्मीर में इतनी रुचि मत ले लो, यह आपके बस का काम नहीं है! और जम्मू कश्मीर में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार मत बनाओ। आप जम्मू कश्मीर की हिस्ट्री, जिओग्राफी नहीं जानते हो, आप कल्चर नहीं जानते हो, आप नॉर्थ ईस्ट के कल्चर को नहीं जानते हो!

यहां गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू बैठे थे। मैंने उनसे पूछा था आपके यहां कितने प्रकार के ट्राईबल्स हैं, तब उन्होंने उठकर बताया था कि 22 या 26 अलग-अलग ट्राईबल्स हैं। तो क्या हुआ? जम्मू कश्मीर में घुस गए आप! सरकार बनाने के लिए! सरकार चली नहीं आपसे। उसको बर्खास्त कर दिया। आप फिर सत्ता में रहना चाहते थें। फिर वहां राष्ट्रपति शासन लगाया। उससे भी आपकी भूख खत्म नहीं हुई। फिर स्टेट को ही खत्म कर दिया और अपने हाथ में ले लिया।

आप ने नॉर्थ ईस्ट का भी वही हाल किया। वहां NRC लाया तो क्या हुआ पूरा नॉर्थ-ईस्ट जल गया। आप ने किसी को इनर लाइन तो किसी को आउटर लाइन कह कर जोड़ा है। किसी न किसी तोड़फोड़ कर कर आपने अपने साथ रखा हैं वरना कोई नॉर्थ ईस्ट में आपके साथ नहीं हैं। आपकी सोच के साथ नहीं हैं। आपके विचारधारा के साथ नही हैं। जबरदस्ती तोड़ जोड़कर उनको आप अपने साथ लगा रहे हैं।

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आज मैं इस सदन के द्वारा पूरे देश को बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर को लेकर जितने भी आरोप लगे वह सारे गलत हैं। जिसके बुनियाद पर आर्टिकल 370 निरस्त कर यूनियन टेरिटरी बनाई थी। उन सारे आरोपो को मैं पढ़ता हूं और उसका जवाब देता हूं। एक, यह बताया गया था के सरकार के प्रयत्नो से वहां अनइंप्लॉयमेंट, गरीबी बढी हैं।

मैं आरबीआई की हैंडबुक पढ़ता हूं जिसमे बताया गया हैं कि जम्मू कश्मीर में 2019 का एंप्लॉयमेंट रेट 5.3 और इंडिया की 6.1 थी। तो ऑल इंडिया से नीचे है। दरिद्र्यता (Poverty) का स्तर 2011-12 जम्मू कश्मीर 10.4 और ऑल इंडिया 21.9 था। दूसरा बहाना बताया गया जो अभी भी सारे भाषणों में बोलते फिरते हैं। मुझे महिनाभर बडी रिसर्च करना पडी इसके लिए इसलिए वे लोग याद रखे अस आंकडेवारी को।

Denied education children right to education for children has been 16 to 18 year has been extended to J&K. मैं बताना चाहता हूं कि यह आरोप सरकार को निरस्त करने का और राज्य को केंद्रशासित प्रदेश बनाने का मौका बना। मैं इस सदन को और सरकार को बताना चाहता हूं कि जम्मू कश्मीर में 1954 से जब बख्शी गुलाम मुहंमद (Bakshi Ghulam Mohammed) है तबसे राज्य में मुफ्त और अनिवार्य रूप से एलीमेंट्री एजुकेशन और विश्वविद्यालय के पढाई तक मुफ्त शिक्षा मौजूद हैं।

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मैं भी फ्री एजुकेशन का यूनिवर्सिटी स्टूडेंट रहा हूं। हमारे यहां फ्री एजुकेशन यूनिवर्सिटी तक है और एलीमेंट्री एजुकेशन 1954 से कंपलसरी हैं और फ्री भी है। और आज आप हमें बताते हैं कि कश्मीर ने 2011 का कानून नही बनाया। तब तो आप 1954 में आप लोग तो पैदा भी नहीं हुए थें। जब से वहां यह कानून है। यह आरोप इस सदन (राज्यसभा) में और दूसरे सदन (लोकसभा) में हम पर किया गया।

मैं हमारे एजुकेशन की तुलना करना चाहता हूं। जम्मू-कश्मीर में 11वीं और 12वीं क्लास के छात्र 2015-16 तक 58.6 परसेंट थें, गुजरात मॉडर्न स्टेट में 43 परसेंट और ऑल इंडिया 56 प्रतिशत। तो हम ऑल इंडिया से भी दो परसेंट ऊपर है। ऐसी 15 साल कि लडकियां जिन्होंने कक्षा आठवी तक स्कूल किया हो, वह 80 प्रतिशत हैं और गुजरात मे 75 प्रतिशत। 

स्कूल अटेंडेंस 15 साल से कम J&K में 27.5 प्रतिशत, गुजरात में 26 परसेंट। स्कूल जानेवाले बच्चे 10 साल से कम उम्र के 37.2 प्रतिशत और गुजरात में 33 परसेंट।

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author

टीम डेक्कन

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